केस स्टडी यहां होता है पहली माहवारी पर जश्न सुशीला सिंह बीबीसी संवाददाता 17 दिसंबर 2014 साझा कीजिए असम के बोगांइगांव ज़िले के सोलमारी में एक अनोखी शादी हो रही है. अनोखी इस मायने में कि असम की परंपरा के अनुसार यहां दुल्हन तो होती है लेकिन दूल्हा एक केले का पौधा है. ये मौक़ा है तोलिनी ब्याह का. शादी की तरह भोज दिया जाता है. जिसमें मांस, मछली, सब्ज़ी, चटनी और चावल बनाया जाता है. ये वो मौका होता है जब बेटी बचपन की उम्र पार कर किशोरावस्था में चली जाती है. ये तब मनाया जाता है जब पहली बार किसी लड़की को महावारी होती है. असम के सोलमारी गांव के ओनियो रॉय के घर उसी की तैयारी चल रही है और सब की नज़र उनकी बेटी गीतूमनी पर है जिसका नवोई तोलिनी ब्याह है. बाहर शोर गुल है, गाना बजाना है तो 13 साल की गीतूमनी रॉय एक कमरे में ज़मीन पर चुपचाप बैठी है. तीन दिन बाद वो स्नान करेगी और कपड़े बदलेगी. उसे दुल्हन की तरह सजाया जाएगा. गीतूमनी की मां भखंत रॉय का कहना था कि ऐसा अवसर उनके जीवन में भी आया था. लेकिन पहले उत्सव के साथ-साथ पाबंदियां भी ज़्यादा थीं. लड़की को चौथे...
चित्रकूट की जल विरासतें - जहाँ वृक्ष ही जल का मंदिर है। मंदाकिनी, स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी और विलुप्त हो रहे कुंड-बावड़ियों का पुनर्जीवन। कंक्रीट के घाट नहीं, वट-पीपल- अर्जुन बरगद के जीवित घाट और वृक्ष मंदिर ही हमारी जल संस्कृति को बचाएंगे। जल है तो तपोवन है।स्वास्थ्य तभी टिकाऊ होगा जब जल वायु और मिटटी स्वास्थ्य होगी। आने वाली पीढ़ी के सपने तभी स्वीकार होंगे।