राजरानी अपने घर में ...
चित्रकूट की जल विरासतें - जहाँ वृक्ष ही जल का मंदिर है। मंदाकिनी, स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी और विलुप्त हो रहे कुंड-बावड़ियों का पुनर्जीवन। कंक्रीट के घाट नहीं, वट-पीपल- अर्जुन बरगद के जीवित घाट और वृक्ष मंदिर ही हमारी जल संस्कृति को बचाएंगे। जल है तो तपोवन है।स्वास्थ्य तभी टिकाऊ होगा जब जल वायु और मिटटी स्वास्थ्य होगी। आने वाली पीढ़ी के सपने तभी स्वीकार होंगे।