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Showing posts from February, 2014

आसमाँ भी चहिए थोड़ी ज़मीं भी चाहिए,

                                            तेरी दुनियाँ ही नहीं तेरा यक़ीं भी चाहिए.                                                                                                                    शिल्पा कन्नन बीबीसी संवाददाता, दिल्ली  गुरुवार, 6 फ़रवरी, 2014 को 12:17 IST तक के समाचार Facebook Twitter Google+ शेयर करें मित्र को भेजें प्रिंट करें भारत के गांव-कस्बों से हजारों लोग हर दिन अपने सपनों की तलाश में बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं, लेकिन उन सपनों का क्या जो इन बड़े शहरों की गुमनाम दीवारों में कैद होकर रह जाते हैं. दूरदराज के इलाकों से बड़ी ...

बाल शोषण में अव्वल भारत

भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश में बच्चों की स्थिति ठीक नहीं है. अरबों के बजट और सरकारी दावों के बावजूद लाखों बच्चे खुले आसमान में जिंदगी बसर करने, बाल श्रम करने और शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं।संयुक्त राष्ट्र के बाल अधिकार कनवेंशन के मुताबिक यह सभी देशों-सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे बाल अधिकारों की सुरक्षा करें और बच्चों को मुश्किल हालात से बाहर निकालें। यूनिसेफ की चीफ एन्ना वेनमैन ने हाल ही में बाल अधिकारों की बुरी स्थिति पर टिप्पणी की है। वेनमैन के अनुसार, यदि किसी समाज के इतने छोटे बच्चों का जबरन बाल विवाह, सैक्स वर्कर के तौर पर शोषण किया जाएगा और उन्हें मूल अधिकारों से वंचित किया जाएगा, तो वह समाज तरक्की नहीं कर सकता। बच्चों के अधिकारों के हनन की गंभीरता को समझना पहला कदम है, ताकि एक ऐसा माहौल बनाया जा सके जहां बच्चे सुरक्षित हों और उनकी क्षमताओं का पूर्ण विकास करने में मदद मिल सके। सोशल एक्टिविस्ट डॉ. इमरान खां के अनुसार, ‘अनुमान है कि देश में करीब चार करोड़ बच्चे ऐसे हैं, जिनके अधिकारों एवं हितों की सुरक्षा करने की सख्त जरूरत है. गैर सरकारी संगठन इसको लेकर काम ...
( 'जनसंदेश टाइम्स' , 13 नवम्‍बर, 2011 ) तुम उन्‍हें अपना प्‍यार दे सकते हो/लेकिन विचार नहीं/क्‍योंकि उनके पास अपने विचार होते हैं/तुम उनका शरीर बंद कर सकते हो/लेकिन दिमाग नहीं/क्‍योंकि उनकी आत्‍मा उनके कल में निवास करती है/तुम उसे नहीं देख सकते/सपनों में भी नहीं देख सकते/तुम उनकी तरह बनने का प्रयत्‍न कर सकते हो/लेकिन उन्‍हें अपनी तरह बनाने की इच्छा मत रखना/क्‍योंकि जीवन पीछे की ओर नहीं जाता/और न ही बीते हुए कल के साथ रूकता ही है। - खलील जिब्रान । बच्‍चे यानी प्रेम एवं निश्‍छलता की साक्षात मूर्ति, बच्‍चे यानी परिवार की सबसे छोटी इकाई, बच्‍चे यानी परिवार की सबसे बड़ी जिम्‍मेदारी, बच्‍चे यानी माँ-बाप की सबसे बड़ी  ‘ मुसीबत ’ , बच्‍चे यानी आज के महानगरों के एकल परिवारों में भी माँ-बाप के बीच के दरकते रिश्‍तों को बाँधे रखने वाली डोर। बच्‍चों की परिभाषाएँ बहुत सारी हैं। जो व्‍यक्ति जैसी सोच और जैसी मानसिकता का होता है, वह बच्‍चों को वैसी ही परिभाषा में ढ़ाल लेता है। वैसे शायरों, कवियों और गीतकारों ने बचपन को जीवन की सबसे सुंदर अवस्‍था बताया है, पर हाल के कुछ दशकों में बचपन ...
BUNDELKHAND CHILDREN ARE SUFFRING BY PARENTS SUICIDE ????????????????? abhimanyu  Farmers' suicide in Bundelkhand: Centre, UP response sought The  Allahabad  High  Court  has asked the Centre and the  Uttar Pradesh  government to file affidavits "indicating the extent to which benefits have been distributed" under various schemes to "alleviate the distress of farmers" in the impoverished Bundelkhand region. Hearing a PIL on farmers' suicide in Bundelkhand, a Division Bench comprising Chief Justice Dhananjay Yeshwant Chandrachud and Justice Dilip Gupta also asked the State Bank of  India  and  Allahabad Bank  to apprise the court of "any waiver, re-structuring or rescheduling of loans" that may have been granted to the farmers. In the order dated November 27, the court also sought details of "the terms on which such relief has been granted and the extent to which benefits have been allowed to the borrowing farmers...