तेरी दुनियाँ ही नहीं तेरा यक़ीं भी चाहिए. शिल्पा कन्नन बीबीसी संवाददाता, दिल्ली गुरुवार, 6 फ़रवरी, 2014 को 12:17 IST तक के समाचार Facebook Twitter Google+ शेयर करें मित्र को भेजें प्रिंट करें भारत के गांव-कस्बों से हजारों लोग हर दिन अपने सपनों की तलाश में बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं, लेकिन उन सपनों का क्या जो इन बड़े शहरों की गुमनाम दीवारों में कैद होकर रह जाते हैं. दूरदराज के इलाकों से बड़ी ...
चित्रकूट की जल विरासतें - जहाँ वृक्ष ही जल का मंदिर है। मंदाकिनी, स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी और विलुप्त हो रहे कुंड-बावड़ियों का पुनर्जीवन। कंक्रीट के घाट नहीं, वट-पीपल- अर्जुन बरगद के जीवित घाट और वृक्ष मंदिर ही हमारी जल संस्कृति को बचाएंगे। जल है तो तपोवन है।स्वास्थ्य तभी टिकाऊ होगा जब जल वायु और मिटटी स्वास्थ्य होगी। आने वाली पीढ़ी के सपने तभी स्वीकार होंगे।