बाल कला कार्यशाला के प्रारंभ में बच्चो का उत्साह बुंदेलखंड जनपद चित्रकूट विकास खंड मऊ की बरगढ़ गाहुर न्यायपंचायत आदिवासी बाहुल्य है .यंहा परिवारों का पलायन बच्चो के विकास में बड़ी बाधा है. अनेक समस्याओ से समझौता करने वाले बच्चे अपनी रुचियों और प्रयासों को प्रस्तुत करना चाहते है .जमीरा कालोनी , कोनिया तथा स्टेशन के सरकारी प्राथमिक विद्द्यालय के बच्चो को जब यह बताया गया कि गर्मी कि छुट्टी में अपनी कला कि पहचान दिलाना व् कला को और अच्छा निखारने के तरीको के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित हो रही है तब बच्चो ने कहा यह काम बहुत अच्छा अब हम कही नही जायेगे .ऐसा लगा कि बच्चे अपनी पहचान के भूखे थे . बच्चो ने बताया क़ी हमारे स्कूल में एस तरह के काम नहीं कराये जाते टीचर जी क्लास में बहुत क्म रहते है . बड़ी उत्साह के साथ १० ...
चित्रकूट की जल विरासतें - जहाँ वृक्ष ही जल का मंदिर है। मंदाकिनी, स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी और विलुप्त हो रहे कुंड-बावड़ियों का पुनर्जीवन। कंक्रीट के घाट नहीं, वट-पीपल- अर्जुन बरगद के जीवित घाट और वृक्ष मंदिर ही हमारी जल संस्कृति को बचाएंगे। जल है तो तपोवन है।स्वास्थ्य तभी टिकाऊ होगा जब जल वायु और मिटटी स्वास्थ्य होगी। आने वाली पीढ़ी के सपने तभी स्वीकार होंगे।