सिसकियाँ लेती समेकित बाल संरक्षण योजना भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश में बच्चों की स्थिति ठीक नहीं है. अरबों के बजट और सरकारी दावों के बावजूद लाखों बच्चे खुले आसमान में जिंदगी बसर करने, बाल श्रम करने और शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं।संयुक्त राष्ट्र के बाल अधिकार कनवेंशन के मुताबिक यह सभी देशों-सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे बाल अधिकारों की सुरक्षा करें और बच्चों को मुश्किल हालात से बाहर निकालें। यूनिसेफ की चीफ एन्ना वेनमैन ने हाल ही में बाल अधिकारों की बुरी स्थिति पर टिप्पणी की है। वेनमैन के अनुसार, यदि किसी समाज के इतने छोटे बच्चों का जबरन बाल विवाह, सैक्स वर्कर के तौर पर शोषण किया जाएगा और उन्हें मूल अधिकारों से वंचित किया जाएगा, तो वह समाज तरक्की नहीं कर सकता। बच्चों के अधिकारों के हनन की गंभीरता को समझना पहला कदम है, ताकि एक ऐसा माहौल बनाया जा सके जहां बच्चे सुरक्षित हों और उनकी क्षमताओं का पूर्ण विकास करने में मदद मिल सके। उत्तर प्रदेश में बाल लिंग अनुपात (चाइल्ड सेक्स रेशियो) राष्ट्रीय अनुपात की तुलना में कम है। पश्चिमी उप्र के विभिन्न इलाकों...
चित्रकूट की जल विरासतें - जहाँ वृक्ष ही जल का मंदिर है। मंदाकिनी, स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी और विलुप्त हो रहे कुंड-बावड़ियों का पुनर्जीवन। कंक्रीट के घाट नहीं, वट-पीपल- अर्जुन बरगद के जीवित घाट और वृक्ष मंदिर ही हमारी जल संस्कृति को बचाएंगे। जल है तो तपोवन है।स्वास्थ्य तभी टिकाऊ होगा जब जल वायु और मिटटी स्वास्थ्य होगी। आने वाली पीढ़ी के सपने तभी स्वीकार होंगे।