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Showing posts from September, 2026
          जल न्याय से पीड़ित मंदाकनी नदी की देन जल  सत्याग्रह   २५ जुलाई २०२६: वह काली दोपहर और इंटेकवेल की दुर्दशा २५ जुलाई २०२६ को मेरा मन बहुत अधिक व्याकुल और बेचैन था। मैं घर से निकला और सीधे उस तट पर पहुँचा जिसे लोकभाषा में ' इमली घाट ' और वर्तमान में ' राजा घाट ' कहा जाता है। मैंने नदी तट पर जाकर हमेशा की तरह सबसे पहले नदी के जल को अपने माथे से लगाया, लेकिन उस दिन पानी में बदबू बहुत अधिक थी। नदी में कोई बहाव नहीं था, वह पूरी तरह स्थिर थी। इसी राजा घाट पर चित्रकूट नगर के घरों, गाँवों और यहाँ आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने वर्ष १९७४ में नदी की जलधारा से जोड़कर एक कुआँ बनाया था, जिसे तकनीकी भाषा में 'इंटेकवेल' (Intake Well) कहते हैं । यह इंटेकवेल यहाँ से २४ घंटे नगर को पेयजल की आपूर्ति भेजता है। विडंबना देखिए कि इसी घाट पर बनी राजा कॉलोनी का मुख्य गंदा सीवर नाला सीधे इसी इंटेकवेल के मुँह पर गिरता है। मैं उस दिन मौन होकर नदी को निहारता रहा और उसकी अदृश्य आवाज़ को सुनने की कोशिश करता रहा। मुझे ऐसा महसूस...