Skip to main content

कोई दिलादे हमें खुशियो के दिन ????????????

                                                     
                                                 
योग के माध्यम से शांति स्थापना

भारत में शांति को खोजने के लिए स्पेन की एलेन और एना ने अतर्रा के आध्यत्मिक संत को गुरु माना। वह अपने मिशन में  स्वामी उमेश योगी के साथ चित्रकूट आयी। मेरी उनसे मुलाकात हुई।  मैंने कहा कि जो लोग आत्मसम्मान से वंचित है -पराधीनता में है तथा पेट की आग में जल रहे है ---उनको शांति देने से शांति मिलती है। मेरे इस  विचार पर वह सबसे अशांत परिवारो में चलने को तैयार हुई।   दिनाक २७ जनवरी २०१४ को मेरे साथ भरतकूप की आदिवासी बस्ती अमर ज्योति दफाई में गयी।  उन्होंने ने वहाँ के बच्चो और जीवन जीने की स्थितियों को देखा ----मैंने देखा कि वह शांति महिलाये अति अशांत होगयी और योग के माध्यम से शांति स्थापना ------करने के विकल्पों पर मेरी राय मांगी।  मैंने कहा कि इनके बराबर शारीरिक योग करने वाला सायद कोई हो इसके बाद यह पेट भरने की चिंता में पूरा दिन सोचते रहते है।बस्ती का  मायूस बचपन मौन आवाज में मानो यह कह रहा था ----कि  कोई दिलादे हमें खुशियो के दिन ????????????



देखते -देखते बस्ती के  कई लोग आगये और उन्होंने सभी से बात करना चाहा पर भाषा की दीवारो ने सीधा संवाद नहीं होने दिया पर वहा के युवाओ  / किशोरियों / बच्चो /महिलाओ /और बच्चो की  आँखों और चेहरे के भावो से दोनों ने एक दूसरे को पढ़ा। मैंने बस्ती के सभी लोगो से पूंछा कि सब लोगो की बड़ी - बड़ी समस्या
गिनती में कितनी है??  महिलाओ ने एक स्वर से कहा कि हमारी बड़ी समस्याए है -


१ -मकान  २ कमाई के लिए सही रोजगार --पत्थर वाला काम में समस्या है --टी बी होती है दवा कराने  को पैसा नहीं है --३ दवाई।  मजे की बात पढ़ाई की मांग किसी ने नहीं की।  महिलाओ ने बताया कि इस बस्ती में ४० वर्ष तक के  करीब ५ लोग पिछले ५ वर्षो में टी बी से मर गए। अभी करीब ५-६ लोग है जो --टी बी से परेशान है काम करने की ताकत नहीं है और अच्छा भोजन उन्हें खिला नहीं सकते ??पूरी बस्ती में एक भी लड़की  कक्षा १० नहीं मिली। १६ वर्ष  तक में  लड़कियो की  शादी  कर दी जाती  है।
इस बस्ती में भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की  गरीबी उन्मूलन की  सरकारी योजनाओ से इसलिए भी लोग वंचित है क्योकि इनके पास गरीबी की रेखा के राशन कार्ड पंचायत स्तर पर नहीं बनाये गए --पारिवारिक लाभ योजनाओ से जोड़ा ही नहीं गया।योजनाये और लोगो के  नागरिक अधिकार क्या है कभी किसी ने नहीं बताया। इस बस्ती में मानव  शोषण की गंध महसूस होती है।
इस भ्रमण में मैंने देखा कि बस्ती के लोग अपनी बात कहने में डरते दिखे। हमसे सबसे अधिक बात महिलाओ ने की।  पुरुष तो बिलकुल दूर था।  कुछ पुरुष थे जो भरतकूप की दूसरी संपन्न बस्तियों के थे।  मुझे इस बस्ती की कुसुमा आदिवासी में अजीब आत्मशक्ति दिखी वह  अपने समुदाय की समस्या को बड़ी बेबाकी से रख रही थी। उसका एक दर्द यह भी था कि सभी  बाहरी लोग इसी प्रकार आते है -हम लोग को लखनऊ बाँदा ले जाते है पर ७५ सालो से हम लोग वैसे के वैसे है। केवल २ लडके १० पास कर पाये वह भी पत्थर पहाड़ तोड़ रहे है।हम नहीं चाहते पहाड़ तोड़ना पर रोटी का दूसरा सहारा नहीं है ?????

अभिमन्यु भाई 
  





                                                         

                                                             
                                                             

Comments

Popular posts from this blog

लोक विराट पुरुष

लोक  विराट पुरुष हजारों साल पहले भारत की मेधा ने विराट-पुरुष की संकल्पना की थी >.. जो सहस्रशीर्ष है , सहस्रनेत्र है , सहस्रबाहु है , सहस्रपाद है ।उसमें कोटि-कोटि युगों का अन्तर्भाव है ।विभिन्न जाति, वर्ग, वर्ण , धर्म आदि उसके हाथ-पैर, नाक-कान -आंख ,पेट इत्यादि अंग-प्रत्यंग हैं परन्तु वे सभी अंग अविच्छिन्न हैं और एक-दूसरे के लिये हैं । वे सब के लिये सब हैं ।इस >सब < के बीच जो नाम-रूप का भेद और असमानता है, वह दृश्यमान है, तात्विक नहीं ।उसकी एकात्मसत्ता ही सर्वजन सत्ता है , जिसे हम लोक कहते हैं । व्यक्ति, वर्ग, राज्य आदि आज हैं किन्तु लोक कल भी था , आज भी है और कल भी रहेगा ॥ वह निरन्तरता है । राजेन्द्र चतुर्वेदी 

किशोरी रूबी का गाँव क्या बाल श्रम और टीबी रोग से मुक्त हो सकता है?क्या बच्चा चोर बलवा काण्ड की सी आई डी जांच हो सकती है?

                                                                   सेवा में  माननीय मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ            विषय  - किशोरी रूबी का  गाँव  क्या बाल श्रम और टीबी रोग से मुक्त हो सकता है?                        क्या बच्चा चोर बलवा काण्ड की सी आई डी जांच हो सकती है? क्या                        नई दुनिया आदिवासी बस्ती की महिलाओ द्वारा १४ -११ ०१५ को आपको                        दिए ज्ञापन पर आप सुनवाई कर सकते है ताकि आप निर्बल के मसीहा दिखे...

लोक सत्संग कार्यक्रम

विश्व अहिंसा दिवस एवं महात्मा गांधी के जन्मदिवस 2 अक्टूबर 2023  से नवाचार के तहत सर्वोदय सेवा आश्रम द्वारा बुंदेलखंड के चित्रकूट जनपद में लोक सत्संग कार्यक्रम का शुभारंभ किया  गया। लोक सत्संग क्या है? संयुक्त राष्ट्र संघ (United nation )द्वारा पूरे विश्व के कल्याण हेतु 17 सतत विकास लक्ष्यों /उद्देश्य निर्धारित  किए हैं।  सामुदायिक संगठन सर्वोदय सेवा आश्रम चित्रकूट अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए 17 सतत विकास लक्ष्यो के द्वारा लोक कल्याण को महत्वपूर्ण मानता है। भारत की सरकार ने 17 सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विशेष कार्यक्रम योजनाएं ग्राम पंचायत स्तर से लेकर जिले स्तर तक में निर्धारित की गई है उनका क्रियान्वयन कराया जा  रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ और भारत सरकार दोनों के द्वारा लोक कल्याण के लिए जो कार्य किया जा रहे हैं उनकी स्थिति पारिवारिक एवं सामुदायिक स्तर कितनी प्रभावित है और बदलाव कहां कितना है इस सत्य को जानना सबसे जरूरी है।  यदि कहीं रुकावटें हैं तो उनको कैसे सामुदायिक ,लाभार्थी तथा सरकार की सहभागिता से कैसे दूर किया जा सकता है इसके लि...