चित्रकूट की नदी अपनी हत्या का बदला भी लेती है ?
आज 25 सितंबर 2026 की रात रामघाट में रहने वाले परिवार और छोटी छोटी दुकानों के कम पूंजी के दुकानदार पयस्वनी नदी की सायद चौथी/पांचवी बाढ़ देख रो दिए। रात में जैसे जैसे मंदाकनी का जल स्तर बढ़ रहा था वैसे वैसे उनकी धड़कने और बढ़ रही थीं आँखों में नींद हवा हो गयी थी। जैसे चित्रकूट के जिलाधिकारी जल परुष पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक राम घाट पंहुचे और उन्होंने -- माइक से सभी को नदी की बाढ़ से बचने की चेतावनी दी तब लोग और भयभीत होगये। कोई कोई एक टक देख रहा था और सोच रहा था कि 29 अगस्त 2026 की बाढ़ जीवन की दुकान पूंजी गृहस्ती सब बह गयी कुछ नहीं बचा और हर बाढ़ के बाद घर दुकान से मिटटी निकालना उसकी सफाई करना आसान नहीं था। लोग नहीं मिलते सफाई कराने के लिए। आपदा में परिवार की मदद के लिए कोई बहुत भागयशाली होगा जिसने बिना कुछ मांगे मदद की हो।
राम घाट में एक भक्त माँ कह रही थी कि मंदाकिनी माता -- के ऊपर जो अत्याचार दुकान दारों ने किया और नदी में नारदा टट्टी बहाई है आज नदी बदला ले रही है। उसने बढ़ती नदी में हाँथ जोड़ कर प्रार्थना कि -- माँ अब उतर जाओ -- अब इन्हे माफ़ कर दो।
आज सवाल है कि नदी के साथ न्याय हो इसके लिए नदी से लाभ लेने वाले और नदी संरक्षण की जिम्मेदारी लेने वाली सरकार क्या सोचती है-- जल न्याय से वंचित लोगो के बारे में और उन व्यापारियों के बारे में -- जिनके होटल दुकाने केवल तीर्थ यात्रियों से चलती है.. नदी में तो बाढ़ आएगी। नदी आज घरो में इस लिए घुस गयी कि समाज राज्य और संतो ने नदी के शरीर को संकीर्ण कर दिया है। यही हाल चित्रकूट में कामदगिरि पर्वत का है. वह भी अब गली न 5 में रहते है। ......
चित्रकूट के तपोवनों में .कंक्रीट के जंगल बढ़ने से जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ और सुखाड दोनों परेशान कर रहे हैं। अब चित्रकूट के विकास में तपोवन पुनर्जीवन और वृक्ष मंदिरो की संस्कृति को पुनर्जीवित करना होगा। नदियों के शरीर में बांध पक्के निर्माण सभी नदी हत्या है। नदियों का सीमांकन नदी की परिभाषा जो भारत सरकार ने निर्धारित की है उसे जमीन में बिना किसी भेद भाव के नदी बिरादरी के साथ कोई नदी संसद बना कर उनके हांथो संरक्षण के काम सौपने होंगे ?नदियों की जबसे हुई है जबसे नदी समाज के संरक्षण से हैट कर सरकार के संरक्षण में गयी.
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