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बुंदेलखंड बाल संरक्षण सर्किल क्या और क्यों ?

                                    
                                                                   बाल संरक्षण सर्किल 
                                                                

परिभाषाये                            
बच्चा -अंतराष्ट्रीय परिभाषा के अनुसार बच्चे का निर्धारण  ० -२४ वर्ष तक की आयु है ,पर भारत में 
          ०-१८ तक की आयु में आने वाले को बच्चा माना गया है। 
बाल संरक्षण- 
बाल संरक्षण- का अर्थ है कि गर्भ से लेकर १८ वर्ष तक से सभी बच्चो को उनकी उम्र के अनुसार संवैधानिक अधिकारों से संबंधित सेवाओ को प्रत्येक सेवा दाता समय पर सहजता और प्यार  के साथ देता दिखे तथा बच्चे की पहल और आवाज को सम्मान देते हुवे उसे उसकी सकारात्मक पहलों को करने में प्रोत्साहन देते हुवे अच्छे परिणामो   में सम्मानित करता हो। प्रत्येक बच्चा अपने कामो से आत्मसम्मानित होते हुवे यदि शिक्षित।,स्वास्थ्य।,प्रशन्न तथा आत्मविश्वासी दिखता है तब यह माना जा सकता है बच्चे का संरक्षण व्यवस्थित है। 

बाल अधिकार -
बच्चो के मानवाधिकारों को बाल अधिकार (Children's rights) कहते हैं।बाल अधिकारों को चार भागों में बांटा जा सकता है 1. जीवन जीने का अधिकार:-पहला हक़ है जीने का,अच्छा खाने पीने का,लड्का हो या लडकी हो,सेहत सबकी अच्छी हो । 2. संरक्षण का अधिकार:-फिर हक़ है संरक्षण का,शोषण से है रक्षण का श्रम,व्यापार या बाल विवाह,नहीं करें बचपन तबाह । 3.सहभागिता का अधिकार:- तीसरे हक़ की बात करें,सहभागिता से उसे कहें,मुद्दे हों उनसे जुडे तो, बच्चों की भी बात सुनें । 4.विकास का अधिकार:- चौथा हक़ विकास का, जीवन मे प्रकास का, शिक्षा हो गुण्वत्तायुक्त, मनोरंजक पर डर से मुक्त ।
भारत सरकार और समाज के प्रयास -
भारत के प्रत्येक नागरिक को प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार है। इस संबंध में “प्रारंभिक (प्राथमिक व मध्य स्तर) पर शिक्षा निःशुल्क हो, प्रारंभिक शिक्षा अनिवार्य हो तथा तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाया जाए एवं उच्च शिक्षा सभी की पहुँच के भीतर हो” कुछ ऐसी बुनियादी सिद्धान्त हैं जो हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं।
शिक्षा का उपयोग मानव व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास, मानवीय अधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रता के लिए किया जाना चाहिए। माता-पिता और अभिभावकों को यह पूर्वाधिकार हो कि वे अपने बच्चों को किस तरह की शिक्षा देना चाहते हैं।
सबके लिए शिक्षा-
अभियान बच्चों, युवाओं व प्रौढ़ों को गुणवत्तायुक्त बुनियादी शिक्षा प्रदान करने की वैश्विक प्रतिबद्धता है। वर्ष 1990 में सभी के लिए शिक्षा के विश्व-सम्मेलन में इस अभियान को प्रारंभ किया गया था।
   17 वर्षों के बाद भी कई देश इस लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे है। सेनेगल के डकार शहर में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने पुनः सम्मेलन में भाग लिया और वर्ष 2015 तक सभी के लिए शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करनेके प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराई। उन्होंने छह मुख्य शिक्षा लक्ष्यों की पहचान की और वर्ष 2015 तक सभी बच्चों, युवाओं और प्रौढ़ वर्ग की शिक्षण आवश्यकताओं की पूर्ति करने की बात कही।
   एक अग्रणी अभिकरण के रूप में यूनेस्को सभी अन्तरराष्ट्रीय पहल को सबके लिए शिक्षा के लक्ष्य को पाने की ओर प्रवृत एवं एकजुट कर रही है। सरकारें, विकास अभिकरण, नागरिक संस्थाएँ, गैर-सरकारी संस्थाएँ एवं मीडिया कुछ ऐसे सहयोगी हैं जो इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
   सबके लिए शिक्षा लक्ष्य को प्राप्त करने का यह अभियान आठ शताब्दी विकास लक्ष्य (मिलेनियम डेवलपमेन्ट गोल, एमडीजी) विशेषकर वर्ष 2015 तक सार्वजनिक प्राथमिक शिक्षा पर एमडीजी -2 और शिक्षा में महिला-पुरुष समानता पर एमडीजी -3 को भी मदद पहुँचा रहा है।
   शिक्षा के महत्व पर ग्रामीण लोगों को प्रेरित किये जाने की आवश्यकता है। निम्नलिखित सूचनाएँ लोगों के लिए समाधान प्रदान करेंगी -
    बालिका शिक्षा
     बाल-मजदूरों के लिए शिक्षा एवं संयोज़क पाठ्यक्रम
अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग व अल्पसंख्यकों के           लिए शिक्षा
शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग, अपंग एवं विशेष बच्चों के लिए शिक्षा
शिक्षा व महिलाएँ

शिक्षा के छह विशिष्ट लक्ष्य:

       * बचपन की शुरुआत में ही समग्र देखभाल व शिक्षा का विस्तार तथा बेहतरीकरण, विशेष रूप से सर्वाधिक संवेदनशील व लाभों से वंचित बच्चों के लिए।
       * यह सुनिश्चित करना कि 2015 तक सभी बच्चे, विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों में और जातिगत अल्पसंख्यक बालिकाएं, पूर्ण, मुफ्त तथा अच्छी गुणवत्ता की प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर सकें।
       * यह सुनिश्चित करना कि सभी युवाओं तथा वयस्कों की सीखने को आवश्यकताएं, सीखने तथा जीवन-कौशल के उचित कार्यक्रमों की समान उपलब्धता हो।
       * 2015 तक वयस्क साक्षरता में 50% सुधार हासिल करना, विशेष रूप से महिलाओं के लिए, तथा सभी वयस्कों के लिए मूल व सतत् शिक्षा की समान उपलब्धता हो।
       * 2015 तक प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक विषमता समाप्त करना, और 2015 तक बालिकाओं को शिक्षा की पूर्ण तथा बराबर उपलब्धता पर ध्यान केन्द्रित कर अच्छी गुणवत्ता की मूल शिक्षा की उपलब्धि हासिल कर शिक्षा में लैंगिक समानता प्राप्त करना।
       * शिक्षा की गुणवत्ता के सभी पहलुओं को बेहतर बनाना और सभी की सर्वश्रेष्ठता सुनिश्चित करना ताकि सीखने के मान्य व मापे जाने योग्य परिणाम सभी द्वारा प्राप्त किए जा सकें, विशेष रूप से साक्षरता, अंकज्ञान तथा आवश्यक जीवन कौशल।
प्रयासों के बावजूद भारत में बच्चो की स्थित -
                       भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश में बच्चों की स्थिति ठीक नहीं है. अरबों के बजट और सरकारी दावों के बावजूद लाखों बच्चे खुले आसमान में जिंदगी बसर करने, बाल श्रम करने और शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं।संयुक्त राष्ट्र के बाल अधिकार कनवेंशन के मुताबिक यह सभी देशों-सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे बाल अधिकारों की सुरक्षा करें और बच्चों को मुश्किल हालात से बाहर निकालें। यूनिसेफ की चीफ एन्ना वेनमैन ने हाल ही में बाल अधिकारों की बुरी स्थिति पर टिप्पणी की है। वेनमैन के अनुसार, यदि किसी समाज के इतने छोटे बच्चों का जबरन बाल विवाह, सैक्स वर्कर के तौर पर शोषण किया जाएगा और उन्हें मूल अधिकारों से वंचित किया जाएगा, तो वह समाज तरक्की नहीं कर सकता। बच्चों के अधिकारों के हनन की गंभीरता को समझना पहला कदम है, ताकि एक ऐसा माहौल बनाया जा सके जहां बच्चे सुरक्षित हों और उनकी क्षमताओं का पूर्ण विकास करने में मदद मिल सके।
उत्तर प्रदेश में बाल लिंग अनुपात (चाइल्ड सेक्स रेशियो) राष्ट्रीय अनुपात की तुलना में कम है। पश्चिमी उप्र के विभिन्न इलाकों की दशा इस मामले में पूर्वी उप्र की अपेक्षा ज्यादा खराब है हालांकि पिछले दस सालों पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यह अनुपात तेजी के साथ घटा है। भारत में बच्चों के साथ लगातार जुर्म बढ़ता जा रहा है। उनकी हत्या, भ्रूण हत्या, अपहरण, खरीद-फरोख्त, मानव तस्करी, वेश्यावृत्ति तथा बाल श्रम की समस्याएं प्रमुख हैं. वर्ष 2007 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किए गये एक अध्ययन में यह तथ्य उजागर हुआ कि भारत में प्रत्येक दो बच्चे पर एक बच्चे का यौन शोषण होता है, जबकि हमारे यहां बच्चों के प्रति जुर्म रोकने के लिए पहले से ही हर तरह के नियम कानून विद्यमान हैं।
बुंदेलखंड में बच्चो की स्थित और भी दयनीय है। प्राकृतिक संसाधनो पर आश्रित आदिवासी समाज जिसके पास जगल में रहने और उसके साथ जीवन जीने का जो ज्ञान था वह अब मूल्य हीन हो गया। विगत १०० वर्षो से जंगलो का कटान जारी है।इस समाज के बच्चे आज भी अशिक्षा का डॅन्स झेल रहे है। पथरो से लड़नेवालेसमाज  में युवाओ को सिल्कोशिश यानि टीबी बड़ी जल्दी होती है। इनके अधिकांश परिवारो में बच्चे लम्बे समय तक भूख सहने के आदि होते है। बरगढ़ की फूलबानो ने गरीबी से लड़ाई लड़ कर इंटर पास किया और उसने ठाना कि बरगढ़ से कि बच्चो की गरीबी को हम सब बच्चे मिलकर दूर करेंगे। बाल आवाज को बड़ी आवाज बनाने वाले बच्चे रामानंद ,बासु ,हिमांशु तथा  विजय मौर्य सहित कुछ बच्चो ने २०११ में अपना बाल धमाका    अखबार निकला और अपने मित्रो की दशा दिशा को सुधारने की  बड़ी  आवाज बनाई। लेकिन इस समाज में अखबार का असर नहीं दिखा जब कि इस अखवार का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री श्री दद्दू प्रसाद ने किया था।बच्चो की आवाज को प्यार से सुनने  और उसे सम्मान देने की क्षमताये परिवार और समाज में नहीं है। 
बुंदेलखंड के सभी गाँवो में परेशान और कर्ज बीमारी से लाचार परिवारो में बच्चो की स्थित और भी दयनीय है। इनके बच्चे स्कूलों से दूर है। परिवारो के अंदर कलह और समस्याओ के कारन बच्चो को अनावश्यक गाली के मार झेलनी पड़ती है इतना ही नहीं माता पिता यदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त है तो उन्हें कम उम्र में काम करने को मजबूर होना पड़ता है। बुंदेलखंड के गरीब परिवारो में अनाथ बच्चो की संख्या बढ़ रही है। मैंने छिटैनी गांव में दो युवा माता पिता जो टीबी से ग्रसित हो कर बच्चो की भूख शांत करने के लिए  मनरेगा में काम करने जाते थे किन्तु उनकी दवा पैसे के आभाव में नहीं हो सकी। मनरेगा में मजदूरी के लिए लम्बी प्रतीक्षा करना उनके बस की बात नहीं थी और एक-एक कर दोनों मर गए उनके बच्चे किसी तरह बड़े भाई को पालने पड़ रहे है। 
चित्रकूट जनपद में किसानो और मजदूरो कीआत्महत्याएं नहीं दिखती किन्तु बुंदेलखंड के बाँदा महोबा हमीरपुर में बड़ी संख्या में किसानो ने आत्महत्याएं की। जब माता पिता आत्महत्या जैसे समाधान को स्वीकार कर लेते है तब बच्चो के सामने जीवन जीने की मजबूत आशा क्या हो सकती है। चित्रकूट में किसानो मजदूरो को जीवन देने की ताकत यंहा केबचे  जंगलो और पानी ने दी है -किन्तु इसके बावजूद यहाँ के बच्चे आभाव में ,गन्दी आदतो के शिकार हो चुके है। गाँवो में नशा और सेक्श फिल्मे बड़ी संख्या में गरीब परिवारो में विद्द्य्मान है जिसका कारण कि किशोरिया बहकावे में आकर घर से भागती और इसके बाद की कहानी तो मार्मिक होती है। गुलाबी गैंग की संपत पाल और महिला शांति सेना की सावित्री रानी ने लड़कियों की व्यथा सुनाई थी।



बुंदेलखंड बाल संरक्षण सर्किल क्यों ?
                                      जून २०१४ को बुंदेलखंड में पहली बार समेकित बाल संरक्षण योजना की समीक्षा चित्रकूट बाँदा के संसद श्री भैरो प्रसाद मिश्रा जी के संरक्षण में हुई। चित्रकूट जनपद में योजना के तहत -कई वर्षो पूर्व जिला बाल संरक्षण समिति -जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में -स्थापित हुई और स्टाफ भी नियुक्त हुवे यंहा तक ब्लाक स्तरीय भी गठित हो चुकी और सरकार ने बड़े संसाधन भी दे दिए।  समीक्षा और अध्यन के बाद पता चला कि -समिति के अध्यक्ष -समिति के कार्यो बैठको आदि के बारे में अनभिज्ञ तथा समिति का स्टाफ बच्चो के मुद्दो की पहचान करने वाले लोगो की न तो समझ बनाने में सक्रीय है और न ही स्वयं समस्याग्रस्त बच्चो के पास पहुँच सका। जिला प्रशासन इन स्टाफो से दूसरे विभागों के काम ले रहा है। 
समिति के अंतर्गत चिन्हित विभागों के बीच बच्चो के मुद्दो पर समन्वय नहीं है ---आदि आदि। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे -चित्रकूट के सामाजिक चिंतक तथा वरिष्ठ अधिवक्ता श्री भालेंद्र सिंह ने कहा कि -कही भी समस्या ग्रस्त बच्चे को देखे सबसे पहले उसे मदद कैसे मिले -इस पर जिम्मेदारी समाज के सभी लोगो को लेनी होगी। सरकारी मदद के भरोसे बच्चे की समस्या का समाधान तब उचित नहीं जब सरकार में निर्णय लेने की गति बहुत धीमी है। बरगढ़ के  बच्चो की जुबान से सुना वह दर्द नाक है ,-बरगढ़ के बच्चे सामाजिक अगुवाई में सक्रीय है यह बड़ी बात है -इनकी संख्या कम है यह मतलब नहीं रखता। हम सब लोग सबसे पहले बरगढ़ चले। 

सर्किल क्या ?
                                       बच्चा जन्म से लेकर युवा अवस्था में --कई स्तरीय घेरे में रह कर जीवंतता स्वास्थ्य और आत्म निर्भरता को प्राप्त करता है। अतः परिवार मोहल्ला और गांव से लेकर न्याय पंचायत ब्लाक तथा जिले /मंडल स्तरीय घेरे जो बाल संरक्षण के लिए जवाबदेह है उनको पुर्स्थापित और पुनर्जीवन का काम घेरे अंदर जा कर ही काम  करना होगा। एक कैटलिस्ट की तरह -अंग्रेजी भाषा की परिभाषा के अनुसार कैटलिस्ट क्या है -Catalysts make things happen. They possess Initiative, Intention, Confidence & Motivation. Become a catalyst!
                                     

                                                                                                                    

अच्छे कैटलिस्ट यदि जिम्मेदार जवाबदेह निर्मित होंगे तभी  बच्चो के बाल संरक्षण के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार हितग्राही --समझदार और जिम्मेदार बनेगे। बुंदेलखंड के समाज में अच्छे  कैटलिस्ट निर्माण का माहौल दिखता नहीं। 

बुंदेलखंड में सर्किल निर्माण /कार्य  प्रगति -
                                १-   चित्रकूट जनपद के मऊ विकास खंड की न्यायपंचायत बरगढ़ की ग्राम पंचायत गोइया ,खोहर में दो प्राथमिक विद्द्यालय कैचमेंट में आने वाले परिवारो के बीच सर्किल निर्माण की जिम्मेदारी 
श्रीमती कमलेश ,श्रीमती सावित्री सहित बाल संसद प्रभारी अनुरुद्ध दुबे ने ली है। चित्रकूट सर्किल में श्री  अमित शुक्ला , श्री महेश महेश मिश्रा ,रूद्र प्रसाद मिश्रा ,श्री आनंद राव तैलंग श्री शंकर पियासी सम्मलित हुवे है।श्रीमती रश्मि कपूर ने भरतकूप परिधि में आदिवासी /दलित और पिछड़ी जातियों के  बीच सर्किल बनाने के लिए संकल्प लिया है। 
                               २ -     बाँदा जनपद में श्री सुरेश रैकवार ने सर्किल निर्माण की जिम्मेदारी ली है। श्री सुरेश रैकवार ग्राम तेंदुरा माफी में ५ प्राथमिक विद्द्यालय के अंतर्गत सर्किल निर्माण पर लोगो के साथ जुलाई ०१४ में बैठक करेंगे। 
                               ३ -      झाँसी में ममता जैन ने सर्किल निर्माण में अपनी प्रतिबद्धता जताई है। 

                            ४ -      चित्रकूट जनपद में  सर्किल कार्यशालाएं प्राथमिक विद्द्यालय ,संकुल बी आर सी तथा जिले स्तर पर सर्किल सञ्चालन कर्ता  द्वारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। सभी कार्यशालाएं अगस्त ०१४ तक आयोजित कर ली जायंगी। 
सर्किल सञ्चालन करने की पात्रता -
१- बच्चो के अधिकारों को जनता हो। 
२- एक अच्छा कैटलिस्ट-बनने की दृढ़ इच्छा और अगुवाई। 
३- नशे से मुक्त। 
४ -समाज में उसकी अगुवाई का सम्मान दिखता हो। 
५- न्यायलय दवारा आरोपित /सजा याप्ता न हो।  

बुंदेलखंड बाल अधिकार संरक्षण सूचना प्रभारी -
                                  श्री अमित कुमार शुक्ला  चयनित किये गए है। जिनका  नंबर -०९४५०२२१६०८ है तथा मेल आई डी है -childvoice.inda@gmail.com. 
अनुरोध -
                                      बुंदेलखंड के सामाजिक कार्यो में लगे सभी युवा साथियो से अनुरोध है कि वह बच्चो के संरक्षण में अपनी भूमिकाये सर्किल बना कर -प्रस्तुत करे और अपने क्षेत्र के प्रत्येक बच्चे को उसके अधिकार सहजता से सेवा दाता देते मिले ऐसी पहल शुरू कर सकते है। सभी पहले सामाजिक संसाधनो से दृढ़ इच्छा शक्ति और सप्ताह में नियमित ४ घंटे के समय दान से संभव है। अच्छे सुविधादाता की पहचान करे सफल कहानी बनाये और उसकी पहचान समाज में बनाये।बुंदेलखंड बाल संरक्षण सर्किल ऐसे सभी सर्किल प्रभारियों को प्रशिक्षण  दक्ष बनाने  और सम्मानित करने  का काम करेगा। 

अमित शुक्ला 
सूचना प्रभारी 
बुंदेलखंड बाल संरक्षण सर्किल
०९४५०२२१६०८
childvoice.inda@gmail.com. 





     
   
                                      






                         








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