बुंदेलखंड के चित्रकूट जनपद की ग्राम पंचायत गोइया के पतेरी गांव मे रहने वाले 70% परिवार अति गरीबी से जीवन जी रहे है।इस समय 15 दिन से मौसम फसलो को नष्ट करने मे तुला है और गांवो मे मजदूर- गरीब काम के अभ्हव मे भूख से गुजर रहे है ... इस गाँव में जीवन जीने की स्थितियां अति दुरूह है।ऐसे परिवारो को गरीबी की रेखा कार्ड तक सरकार नही दे रही है ? इन्ही परिवारो के बीच पूजा नामक युवती रहती है जिसे ७ माह गर्भ है।सर्वोदय सेवा आश्रम के सामाजिक कार्यकर्ताओ १५ जनवरी ०१५ को पूजा के घर का भ्रमण किया और गर्भावस्था में स्वास्थ्य परिक्षण पोषण सम्बन्धी दिनचर्या की जब जानकारी ली तब सबके हाथ पैर फूल गए।पूजा ने बताया कि कई शाम भूखो सोना पडता है। केवल दो वक्त किसी तरह नमक रोटी मिल जाती है।कार्यकर्ताओ की सूचना पर दिनाक १७ जनवरी ०१५ को हम लोग प्रत्यक्ष स्थित देखने पूजा के गाँव गए। पूजा के पति का नाम रमेश है। हमें पूरा परिवार मिला। हमने समुदाय के साथ मिल कर पूजा के पति से बात की और भोजन की सच्चाई को जाना। रमेश ने कहा की बाबू जी आज का भोजन कैसे होगा पता नहीं घर में एक दान नहीं है =इस समय मौसम परेशान किये है पत्थर तुड़ाई का काम भी बंद है। अमवा के ठेकेदार बिहारी से रु-५०० कर २५०० तक लिया था वह भी ख़त्म हो गए किससे अब मांगे। हमारे गाँव में सब गरीब है। तब जैसे हम भूखे रहते है वैसे हमारे बच्चे भी भूख सहते है। हमारे साथ उस डेन मार्क के अतिथि हैनरियेट और जॉरगन भी थे।
इतने में पूजा रो कर बोली कि बाबू जी हमसे भूख नहीं सही जाती। हमारे पेट में बच्चा है वह कैसे जियेगा ??उसकी बात सुन कर हम सभी की आँखे नाम हो गयी। मैंने रमेश से पूछा कि तुम्हे गरीबी की रेखा का कार्ड मिला है ?वह बोला की कोई कार्ड नहीं मिला। कहा की रासन की दूकान से हमें कुछ नहीं मिलता। रमेश ने कहा हमें टीबी है जिसके कारण हम बड़ा काम नही कर पाते।मैंने पूछ की सरकारी अस्पताल से क्या टी बी की दवा मिलती है बोला हां जब जाते है तब लेकिन किराया न होने के कारण कभी कभी नहीं जा पाते और कभी कभी जब जाते है और डाक्टर न मिले तो दवा नही मिलाती। मैंने पूछ क्या गाँव स्तर आशा कभी दवा के बारे में जानकारी लेती है वह बोला कोई यहाँ हमारा दर्द पूछने नहीं आता।
मैंने गाँव के अन्य लोग जो इस बैठक में सम्मलित थे उनके जीवन के बारे में जानकारी ली तो पता चला की इस बस्ती में चमार और कोल दो जाती के लोग है सबकी स्थित दयनीय है।सभी लोगो से पूछ कि पूजा की तरह दयनीय और भी है तो समुदाय ने बताया की-चन्द्रकली रन्नो भी पूजा की तरह दयनीय जीवन जी रही है -मै उनसे मिला तब लगा की माता का जीवन बड़ा कठिन है =पर माँ होने के नाते बच्चो के लिए सब सहती है -
चन्द्र कली की उम्र करीब ३५ वर्ष की होगी उसने बताया की उसके पति शारीरिक व् मानसिंक रूप से
अपग है--घर में १५ साल का लड़का और १७ साल की लड़की और पति है -कोई स्कूल नही जाते क्यों की लड़का पिता की सेवा में और लड़की खाना तथा अन्य लगी रहती है ?चन्द्रकली ने कहा की वह बाजार में मजदूरी कर करीब महीने भर में १५०० रु कमा पाती है ==बस नमक रोटी से गुजारा हो जाता है--हमें प्रधानो ने गरीबी की रेखा में नही रखा राशन से मिटटी का तेल तक नही मिलता।
यही स्थित श्रीमती रन्नो की है --उसके पति एक दुर्घटना में अपग हो गए।रन्नो है घर में १ लड़की ४ लडके है पर स्कूल कोई नही जाते। लड़की अनूपा ने कक्षा ५ के बाद पढाई बंद कर दी थी --मैंने अनूपा से पूछा कि तुम्हे खाने में क्या अच्छा लगता है --तो बड़े संकोच के साथ बोली कि -चावल दाल -तब मैंने पूछा अपने मन का भोजन रोज खाती हो बोली नही क्यों की दाल चावल कभी १०-१५ दिन में बनाता है??ऐसा इसलिए की न तो इनके पास ही कमाने वाला --
इसी प्रकार वृद्धो में महिलाओ की स्थित और भी दयनीय है ??इन्हे पेंशन नही है जिनको बनी भी उन्हें मिल नही रही।
सर्वोदय के सभी कार्यकर्ताओ ने मिल कर तय किया था की सरकारी मदद की मांग और उसे दिलाने में बड़ी मस्सक्कत करनी पड़ेगी-- यह काम करगे लेकिन पहले पूजा को भोजन की मदद बिना देर किये की जानी चाहिए -सभी ने आपस में चंदा कर ५० किग्रा आता २० किग्रा चावल ५ किग्रा दाल आदि सहित सब्जी मसाला दान में एकत्र किया और २६ जनवरी ०१५ को गाँव के प्राथमिक विद्द्यालय में बाल रक्षा यज्ञ आयोजित किया।
इस यज्ञ में गाव के करीब ८० महिलाओ बच्चो और पुरुषो ने भाग लिया। प्राथमिक विद्द्यालय के प्रधाना चार्य श्री रामबली ने इस यज्ञ को अनोखा बताया कहा की पूजा की स्थित को देख कर हम सब दुखी है उन्होंने कहा समाज को अपने भरोसे रहने की ताकत भी आनी चाहिए सरकारी भरोसा सब जगह अच्छा नही है =सभी ने मिल कर निर्णय लिया की बाल आपदा कोष बनाये जिसमे सब अपनी बचत का दान दे ताकि समाज अपने धन से बच्चो की रक्षा कर सके --श्री राजबली जी ने १०० रु बाल कोष में दान दिए।
बुंदेलखंड आपदाओ से जूझ रहा है ---इस क्रम में बाल रक्षा यज्ञ और बाल आपदा कोष बड़े समाधान का रास्ता देते है लेकिन इन कार्यो में निरंतरता समर्पणता के साथ न्याय और निष्पक्षता वाले समझदार जमवन्तो की अगुवाई जरूरी है?हमें आशा है कि यह बाल रक्षा यज्ञ और कोष दोनों पूजा को स्वास्थ्य बनाते हुवे स्वास्थ्य बच्चे का जन्म करायेगे इतना ही नहीं जो बच्चे अशिक्षा से ग्रसित है उन्हें शिक्षा स्वालम्बन से भी जोड़ने का विकल्प खोजेंगे ??इसमे सभी की मदद मिलेगी तो यह काम और गति के साथ होगा। सर्वोदय सेवा आश्रम इस मुद्दे की वैधानिकता पर मदद करेगा ताकि यह कार्य पारदर्शी और टिकाऊ बने।
अभिमन्यु भाई
सर्वोदय सेवा आश्रम
सामाजिक कार्य कर्ता
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