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असम की जाह्नवी 17 साल की उम्र में एचआईवी से संक्रमित हो गईं थी. यह संक्रमण उनतक उनके पति से पहुंचा था और डॉक्टरों के मुताबिक वे महज़ तीन महीने की मेहमान थीं.
आज जाह्नवी 36 साल की हैं और एड्स के ख़िलाफ़ मुहिम चला रही हैं. उनके पति और दो साल की बच्ची की तो मौत हो गई, लेकिन जाह्नवी ने दुनिया को एपने एचआईवी पॉजिटिव होने के बारे में बताया और दूसरे लोगों के लिए उम्मीद की रोशनी बन गईं.
उन्होंने 2002 में ‘असम नेटवर्क ऑफ़ पॉजिटिव पीपल’ नामक संस्था शुरू की. यह संस्था एड्स पीड़ितों के लिए मुफ़्त में काउंसलिंग का काम करती हैं. इस नेटवर्क के 50 सक्रिय सदस्य हैं जो एचआईवी और एड्स पीड़ितों की देखभाल का काम देखती है.

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