बाल श्रम टी बी उन्मूलन पर रिपोर्ट

अभिमन्यु भाई
सर्वोदय सेवा आश्रम चित्रकूट
childline Team दिनांक १० अगस्त २०१५ को सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष श्री मधसूदन भाई तथा चित्रकूट चाइल्ड् लाइन टीम के साथ चित्रकूट जनपद की अकबर पुर ग्राम पंचायत की नई दुनिया आदिवासी बस्ती पहुंचे ही थे कि- इस बस्ती की कई महिलाओ ने घेर कर सवाल पूछना शुरू दिया। इनमे किशोरिया बच्चे तथा पुरुष भी थे।महिलाये रो रो कर कह रही थी कि पुलिस हमारे बच्चो को क्यों मार रही है क्यों जेल में बंद कर रही है ? क्या अपराध किया है हमारे बच्चो ने ?२ दिन से हमारे घरो में चूल्हा तक नही जला। छोटे बच्चे भूखे है घर में खाने को नही है कमाने वाले घर से भागे है। चाइल्ड लाइन में इसी बस्ती की किशोरी रूबी द्वारा फ़ोन करके केश दर्ज करने पर प्राप्त जानकारी के साथ इस बस्ती में गए थे। बस्ती के सभी लोगो के साथ निर्णय हुवा कि कल बस्ती के सभी लोगो के साथ बैठेंगे और समाधान पर चिंतन कर निर्णय लेगे।
बैठक
दिनांक ११ अगस्त २०१५ को बस्ती की महिलाये एकत्र हो कर अपने बीच गाँव में बैठे हम लोगो की प्रतीक्षा कर रही थी। बैठक करीब १२ बजे शुरू हुई। बैठक में उपस्थित महिलाओ में सर्व श्री श्रीमती बेला ,कुंता देवी ,कलावती ,विद्द्या ,,रानी , संतोष ,पनवा ,दुवासिया , चुनिया , प्रेमा , कमला मुन्नी एतवरिया आदि महिलाओ के साथ किशोरिया क्रमश रावी ,सुधा , निर्मल धर्मेन्द्र रीमा रवीना सरिमा ,ऊषा मिथलेश थी। उपस्थिति में बेलवा को छोड कर सभी ने अंगूठे लगाए थे और किशोरियों ने बड़ी मुश्किल से हस्ताक्षर किये। ऐसा लगता था कि किशोरियों को हिन्दी भाषा के शब्दों को लिखना नही आता। सभी ने मिल कर निम्न समस्याओं को रखा -
१- हम लोग बच्चो के साथ प्रतिदिन मजदूरी में जाते है तब घर में अनाज आता है। इस समय काम बंद है।
२- पुलिस के डर के कारण गाँव में पुरूष सब भागे है। कुछ लडको को पुलिस ने निर्दोष पकड़ा है।
४- सुन रहे है कि अब दिल्ली की पुलिस आएगी सबको बंद कर देगी।
५- कुंता ने कहा की -मुझे कमर का दर्द है पति को खांशी आती है -जान मेरी १२ और १५ वर्ष की लडकिया मिथलेश और उषा खदानों में काम करने जाती है तब घर में सबको भोजन मिलता है।
६- हमारे पास जमीन नही है। सरकारी जमीन और मकान भी हमें नही मिला। कच्चे घरौदो में रहते है।
हम सभी मजदूर परिवारो के राशन कार्ड गरीबी रेखा के नही है।
७- यहाँ खासी एक बड़ा मर्ज है -टीबी के रोगियों को दवा नही मिलती। मिटटी कातिल भी नही मिलता।
८ -किशोरियों ने कहा कि -हमें बीमार माता पिता की दवाई और भूख के लिए ट्रको में जाना पड़ता है।
९- हमें कभी कभी भर पेट भोजन नहीं मिलता। दिन भर में मजदूरी ७० रु ही मिलाती है।
१० - हम भी पड़ना लिखना चाहते है किन्तु कमाई के कारण नही पढ़ सकते।
बेला ने कहा की आप लोग ही बताइये कि क्या हम लोगो की हैसियत है की हम और हमारे बच्चे किसी की ह्त्या करने में सक्षम है या बलवा करा सकते है ?बलवा तो बालू खदान और वन विभाग की लेन देन के कारण एक साजिस ने कराया। बच्चा चोर गिरोह की अफवाह फैलाने वाले लोग कौन थे ? पुलिस ने ऐसे लोगो से कोई बात नही की और हम लोगो से जानकारी भी नही ली कि काण्ड में हम लोग क्या जानते है क्या नही। जिस रात काण्ड हुवा उस रात हम और हमारे बच्चे जिनको पुलिस खोज रही है सभी घरो में सो रहे थे। सुबह हमें जानकारी हुई कि बच्चा चोर गिरोह के धोखे में खजांची बस्ती की ओर से आरही भीड़ वन विभाग की जीप थी। भीड़ ने बच्चा चोर मान कर इसका पीक्षा किया। पीछा करते हुवे व्यास कुण्ड की पहाड़ी के पास खडी जीप पर हमला बोला जिसमे एक की मृत्यु हुई। हमारी बस्ती तो अंत में पड़ती है। अभी यह तक नही मालुम की कितने लोग नामजद है। सभी ने बेला की बात का समर्थन किया और निर्णय लिया गया कि हम सब लोग अपनी बात मीडिया में रखेंगे।
दिनांक १२ अगस्त ०१५ को चित्रकूट के जिला सूचना कार्यालय में सर्वोदय सेवा आश्रम चित्रकूट की और से पत्रकार वार्ता बुलाई गयी जिसमे -सभी समस्या ग्रस्त महिलाओ किशोरीयो ने ने अपनी बात को रखा और बच्चा चोर बलवाकांड की हकीकत रखी और मांग की कि इस काण्ड की सी आई डी जांच कराई जाय। मीडिया ने उनकी बात को अखवारों में छापा।
दिनांक १३ अगस्त ०१५ को एस डी एम कर्वी को चाइल्ड् लाइन चित्रकूट की ओर से पत्र लिखा गया और अनुरोध किया गया कि - कि बस्ती में बच्चे माताये कई दिनों से भूखे है -घरो में अनाज धन नही है। इसी प्रकार चाइल्ड लाइन टीम ने दिनाक २४अगस्त ०१५ ने बस्ती में जा कर निम्न समस्याओ से परेशान माताओ बच्चो तथा मरीजों आवेदन पत्र लिए सीएमओ तथा मुख्य विकास अधिकारी को सीधे मिल कर प्राप्त कराये गए।
दिनांक १० अक्टूबर २०१५ को नई दुनिया बस्ती की करीब १२ महिलाओ ने चित्रकूट की जिलाधिकारी को पत्र लिखा कि हमारे निर्दोश लडको को जेल से छोड़ा जाय ,बलवा काण्ड की सी आई डी जाच कराई जाय। हमें बताया जाय कि किसने हमारे बच्चो को मारते -बलवा देखा है। आदि आदि--- हमारी मांगो पर विचार नही तब हम १३ अक्टूबर ०१५ से क्रमिक अनसन में बैठेंगे। एक लम्बी प्रतीक्षा के बाद जिला प्रशासन और सरकार की ओर से कोई कार्यवाही न होने पर विवश होकर भूख से लड़ाई लड़ने वाली आदिवासी समाज की २२ महिलाये बेला के नेतृत्व में व्यास कुण्ड में अनशन पर बैठी।
बाल श्रम टी बी उन्मूलन जन सुनवाई -
चाइल्ड लाइन चित्रकूट द्वारा दिनांक २३ अक्टूबर ०१५ को टी बी और बाल श्रम उन्मूलन मुद्दे पर जनसुनवाई व्यास कुण्ड में आयोजित की गयी। इस जनसुनवाई में चित्रकूट के संत सर्व श्री श्री सनकादिक जी ,संत बलराम दास ,संत राम नरेश दास ,तथा संत सच्चितानन्द साथ पूर्व आईएएस श्री कमल टावरी व् श्रीमती डॉ नवेदिता हरन और इंटर नेशनल इंस्टीटूट फॉर होलिस्टिक रिसर्च की सामाजिक वैज्ञानिक श्रीमती इर्मेल वी मारला के साथ चाइल्ड लाइन चित्रकूट की टीम आदिवासी समुदाय को सुनने के लिए पहुंचे । पुलिस अधीक्षक श्री केशव कुमार चौधरी ने आने का पत्र दिया था किन्तु वह विशेष कारणों से नहीं पहुंच सके।इस जन सुनवाई में करीब ५०० आदिवासी लोग बाल बच्चो जिसमे बाल श्रमिक अधिक थे। आदिवासियों की और से श्रीमती बेला ,रामआसरे कु रिकी ,राजा बाबू कलावती और श्यामा ने हिम्मत के साथ अपने समुदाय के दर्दो को रखा।उसने कहा कि - बच्चो का बचपन छीनने वाली व्यवस्था ने हमें हत्यारा बताया। श्रीमाती बेला ने कहा कि --हम लोग पढ़े लिखे नही है पुलिस से अधिकारियों से बात नही कर सकते , न जमानत को पैसे है न हमारे रिस्तेदारो के पास इतनी सम्पत्ती है की वह जमानत ले सके -कैसे लडके छूटेंगे। चाइल्ड लाइन वालेंटियर श्री महेंद्र तिवारी ने बताया कि सर्वे के दौरान बस्ती में स्कूल नामांकन से वचित ६-१४ आयु के २९ बच्चे तथा बाल श्रमिक ११ चिन्हीत है -सभी दवाई खिलाई जैसे मुद्दो के लिए काम करते है। बच्चो ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है --
समस्याओ की सुनवाई के बाद संतो ने और सम्मानित पूर्व आई इ एस अधिकारियो ने कहा कि आदिवासी समाज नशा छोड़े तथा सरकार के साथ संवाद कर निम्न ९ समस्याओ के समाधान का रास्ता खोजेंगे।
१- क्रेसर मजदूरो को श्रम विभाग की नीतियों से लाभान्वित करना।
२- आदिवासी बस्तियों के सभी बच्चो को शिक्षा -हुनर दिलाने के अवसर और बच्चो से कठोर श्रम पर पाबंदी।
३- आदिवासी बस्तियों से दूर क्रेसर स्थापना -मजदूरो का बीमा।
४- टी बी मरीजों बच्चो और सभी वृद्धो का समय पर स्वास्थ्य परीक्षण।
५ - स्कूल सुधार-बच्चो को हुनरवान बनाने के प्रयास।
६ सार्वजनिक वितरण प्रणाली सभी को गरीबी का राशन कार्ड और न्याय पूर्ण वितरण
७ -बच्चा चोर गिरोह की सी आईडी जांच।
८ - सभी परिवार /घरो में सहजन नीम नीबू के साथ हरी शब्जी की वांडी ।
दिनांक २९ अक्टूबर २०१५ को बस्ती की महिलाओ ने जनसुनवाई के निर्णय के बारे में जिलाधिकारी चित्रकूट को पत्र लिखा। इसी क्रम में सर्वोदय सेवा आश्रम की ओर से जिलाधिकारी महोदय को दिनांक ९-११-०१५ को पत्र लिखा गया। जिसमे महिलाओ द्वारा शांति मार्च तथा संत अनिल द्वारा क्रमिक अनशन की बात कही गयी थी।
शांति मार्च
१३ नवम्बर २०१५ को नई बस्ती की महिलाओ तथा बच्चो ने रघुपति राघव राजाराम साथ चित्रकूट में शान्ति मार्च निकाला। यह मार्च व्यास कुण्ड के युवा संत अनिलपुरी जी के नेतृत्व में चित्रकूट जनपद मुख्यालय के राजमार्ग में निकला।
निष्कर्ष
अभी तक कोई सकारात्मक कार्यवाही सरकार की और से नही निकला। ७० वर्षो से लगातार भूख बेबसी और लाचारी का जीवन जीने वाले भरत कूप और शिवराम पर के आदिवासीयो के बच्चे आज तक अपना अधिकार इसलिए नही पा रहे क्यों कि इनके विकास में सबसे बड़ी बाधा --लोकतंत्र है। इस लोकतंत्र में जनता के द्वारा चुने जाने वाले जनप्रतिनिधि ऐसे समुदाय की योजनाओ में डाका डालते है जो दबा है अशिक्षित है रोटी का बंधुवा है। मजदूर वर्ग जो संसाधनो से टूटा है और सरकारी न्याय पर किसे भरोसा नही वह अपने हक़ की लड़ाई का अंतिम लक्ष्य रोटी तक मानते है। सरकारी अधिकारी तो योजनाओ के बंदरबाट में बहुत माहिर होते है। बच्चा चोर बलवा काण्ड की सी आई डी जांच क्यों नही हो रही ? इसका मुख्य कारण है कि वन बिभाग की टीम पर बालू माफियाओ ने हमला कराया जिसका मुख्य कारण लेनदेन था। बन विभाग का रात में गस्त क्यों? क्या गस्त वैधानिक है ?वन विभाग की जायका जैसी परियोजनाएं इन आदिवासियों के बीच क्यों नही चली ?गस्त रात ११ बजे क्यों ? उस पहाड़ी में ऐसा कौन सा खनिज था। स्थानीय पुलिस और पंचायतो को मालुम था की रात ११ बजे बालू चोरी रोकने के लिए गस्त होती है। भरतकूप के करीब ५००० आदिवासी जिन बस्तियों में रहते है -वहा आजादी के बाद से अबतक बस्ती में कुपोषण अशिक्षा टीबी क्यों है ? बच्चो का बचपन छीनने वालो के लिए कोई कार्यवाही नही है।
सरकारी और संगठित गिरोह में बड़ी सूज बूझ है।यह आदिवासी अपने श्रम से करीब २ लाख रु प्रतिदिन सरकार को खनिज रवन्ने में दिलाते है किन्तु इनके पास इतनी क्षमता नही है वह अपने मरीज को १५ किमी अस्पताल का किराया दे सके।दवा की बात दूर है। इनके परिवार का हर १० बर्ष का लड़का /लड़की स्कूल नही जाता भोजन की लड़ाई में जुट जाता है। ट्रको और खदानों में जाता है। कैसे थमेगा यह अन्याय बच्चो के साथ ?बच्चो का बचपन छीनने वाली व्यवस्था ने हमें हत्यारा बताया।
सर्वोदय सेवा आश्रम चित्रकूट
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