ज्ञारसी बाई
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राजस्थान के बारन ज़िले में ज्ञारसी बाई बीते दो दशक से सहारिया आदिवासी समुदाय के बंधुआ मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ रही हैं.
ज्ञारसी ख़ुद कभी स्कूल नहीं गईं और उनके पिता एवं पति भी दिहाड़ी मज़दूर हैं. लेकिन इससे ज्ञारसी बाई की हौसले में कोई कमी नहीं आई.
दो दशक के सफ़र में ज्ञारसी बाई ने महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार के ख़िलाफ़ हमेशा आवाज़ उठाई है. उन्होंने अपने समुदाय की महिलाओं में जागरूकता के स्तर को बढ़ाया है.
ज्ञारसी बाई ने सहारिया आदिवासी समुदाय की लड़कियों को पढ़ने लिखने के लिए प्रेरित किया. उनकी संस्था ‘जागृत महिला संगठन’ का आदिवासी महिलाओं को सशक्त करने में अहम योगदान रहा है.

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