विश्व अहिंसा दिवस एवं महात्मा गांधी के जन्मदिवस 2 अक्टूबर 2023 से नवाचार के तहत सर्वोदय सेवा आश्रम द्वारा बुंदेलखंड के चित्रकूट जनपद में लोक सत्संग कार्यक्रम का शुभारंभ किया
गया।
लोक सत्संग क्या है?
संयुक्त राष्ट्र संघ (United nation )द्वारा पूरे विश्व के कल्याण हेतु 17 सतत विकास लक्ष्यों /उद्देश्य निर्धारित किए हैं।
सामुदायिक संगठन सर्वोदय सेवा आश्रम चित्रकूट अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए 17 सतत विकास लक्ष्यो के द्वारा लोक कल्याण को महत्वपूर्ण मानता है।
भारत की सरकार ने 17 सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विशेष कार्यक्रम योजनाएं ग्राम पंचायत स्तर से लेकर जिले स्तर तक में निर्धारित की गई है उनका क्रियान्वयन कराया जा
रहा है।
संयुक्त राष्ट्र संघ और भारत सरकार दोनों के द्वारा लोक कल्याण के लिए जो कार्य किया जा रहे हैं उनकी स्थिति पारिवारिक एवं सामुदायिक स्तर कितनी प्रभावित है और बदलाव कहां कितना है इस सत्य को जानना सबसे जरूरी है।
यदि कहीं रुकावटें हैं तो उनको कैसे सामुदायिक ,लाभार्थी तथा सरकार की सहभागिता से कैसे दूर किया जा सकता है इसके लिए लक्षित लाभार्थी एवं उनके हितग्राही तथा समुदाय के साथ सत्य को जानना । सकारात्मक नकारात्मक मुद्दों की पहचान करना उन पर सामूहिक विमर्श के अवसर देते हुए
तथा समाधान के ऐसे विकल्प जिनमें स्थायित्व उसको सहभागिता के साथ चिन्हित करना और सब की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए विकल्पों की पहचान कर सभी की सहभागिता से स्थायित्व वाले समाधानों पर चर्चा करते हुए आम सहमति प्राप्त करना। सरकारी और गैर सरकारी मंचो में समस्या ग्रस्त समूह की पहचान बनाना और उनके द्वारा समाधान के विकल्पों को प्रस्तुत करना। लोक कल्याण तभी होगा जब मनुष्य का निर्माण संपूर्णता के सिद्धांतों पर
होगा।
सर्वोदय सेव आश्रम मानता है कि मनुष्य की संपूर्णता का सिद्धांत प्रकृति द्वारा निर्धारित नैसर्गिक न्याय दर्शन के आधार पर होता है। बच्चे ही आगे चलकर मनुष्य बनते हैं। मनुष्य में यदि मनुष्यता नहीं है तो जानवर से भी खराब स्थिति में है।
परिवार समुदाय में जब बच्चों का विकास मनुष्यता पैदा करने के लक्षण के साथ होगा तभी समुदाय और समाज में मनुष्यता दिखाई देगी और राष्ट्र स्वस्थ आनंदित दिखाई देगा।
व्यक्ति और व्यक्तियों के समूहों से मिलकर परिवार समुदाय बनता है। विभिन्न संस्कृतियों भाषाओं तथा भौगोलिक परिस्थितियों में जो समुदाय रहते हैं वह सब मिलकर समाज बनता हैं। यह पूरा समाज लोक कहलाता है। इसीलिए भारत के संविधान में लोकतंत्र की बात कही गई है। ऐसा तंत्र जिसमें लोक राजा है और सरकार सेवक है।
सर्वोदय सेवा आश्रम मानता है कि स्वस्थ संवाद महत्वपूर्ण उपकरण है मनुष्यता को स्थापित करने का। इस संवाद को स्वस्थ आनंदित कैसे बनाया जाए इसके लिए एक ही आधार है की संवादों में सत्य और पारदर्शिता बुनियादी तौर पर स्थापित हो। संवादों में परनिंदा चमत्कार कल्पना आधारित आरोप हिंसा तथा जाति धर्म सहित सभी प्रकार के भेदों की कहीं गुंजाइश न हो।
यानी ऐसा मिलन, संग या संगति विमर्श, या संवाद जो सत्य पर आधारित है उसे सर्वोदय सेवा आश्रम द्वारा लोक सत्संग घोषित किया गया है।
लोक सत्संग में जरूरी है कि जो सत्संग करने के लिए अधिकृत है वह प्रशिक्षित और दक्ष होना चाहिए।
इस सत्संग में निम्न विषय महत्वपूर्ण
होंगे।
1-समुदाय द्वारा स्वीकार प्रेरक सफलताएं असफलताएं और कहानी।
2-समस्या ग्रस्त जीवन और सरकारी योजनाओं से दिखने वाला बदलाव.
3- समुदाय द्वारा चिन्हित मुद्दों पर विमर्श संवाद!
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